कोटि प्रयास करे किन कोयकि सत्य का दीप बुझे न बुझाये Autore: सुरेन्द्र मोहन पाठक Copy Quote More from सुरेन्द्र मोहन पाठक “धोखा देना और धोखा खाना इंसानी फितरत है, जो इस लानत से आजाद है वो जरूर जंगल में …” “तलवार का घाव भर सकता है लेकिन जुबान की खराश जिन्दगी का नासूर बन जाती है.” “क्रोध में वो आंधी होती है जो विवेक का दीपक बुझा देती है” “ भाई जान से जायेगा, तू भाई से जायेगा | "- Gawaahi”